देश की ताकत
जिस प्रकार देश के नौजवान सैनिक बलिदान और रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर देते हैं ठीक उसी प्रकार इस महान लोकतंत्र के इन स्तंभों शिक्षक डॉक्टर और पुलिस ने अपने कर्तव्यों को पूरा किया।
अध्यापक पुलिस और डॉक्टर
भारत में स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत तो पहले से ही अच्छी नहीं थी, लेकिन कोरोना वायरस ने इस व्यवस्था को और हिलाकर रख दिया है. भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को कोरोना से बचाने के लिए ढाल बने हुए हैं. वे 12-12 घंटे काम करते हैं, परिवार से दूर रहते हैं और फिर क्वारंटीन में चले जाते हैं. उनकी जगह कोई और डॉक्टर ले लेता है. यह सिलसिला बिना रुके पिछले तीन महीने से ऐसे ही चल रहा है. डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के सामने केवल यही चुनौतियां ही नहीं है. पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) किट पहनना और उसे उतारना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
इसी के साथ यदि बात करे हम हमारे संरक्षक पुलिस प्रशासन की तो इन्होंने जिस प्रकार इWस महामारी में देश की जनता को एक चैन में बांधे रखा था और सभी की आवश्यक जरूरतों को पूरा किया था शायद ही ऐसा कोई कर पाता।
और भारत जैसे लोकतांत्रिक देश को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना कोई छोटी जिम्मेदारी नहीं थी जो समाज के स्तंभ शिक्षक समुदाय ने निभाई।
अब इन लोगो ने अपने फर्ज़ को किस तरह पूरा किया हैं यह तो आप जानते ही है।
LINKS FOR SOCIAL MEDIA SUPPORTS :

No comments:
Post a Comment